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जनकृति परिचय


‘जनकृति’ विमर्श केंद्रित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका है. सृजन के प्रत्येक क्षेत्र कविता, नवगीत, कहानी, लघु कथा, व्यंग्य, नाटक, सिनेमा, रंगमंच, आलोचना, समीक्षा में विमर्श को स्थापित करने के उद्देश्य से इस पत्रिका को निकाला जा रहा है. इसके अतिरिक्त पत्रिका में कई विमर्श स्तंभ है जैसे शोध विमर्श, बाल विमर्श, लोक विमर्श, सिने विमर्श, रंग विमर्श, स्त्री विमर्श, दलित एवं जनजाति विमर्श, भाषिक विमर्श, शिक्षा विमर्श एवं सम्पूर्ण विश्व में हिंदी के विकास हेतु हो रही गतिविधियों के लिए हिंदी विश्व नाम से स्तंभ रखा गया है. हम सृजन क्षेत्र से जुड़े सभी सृजनकर्मियों का पत्रिका में स्वागत करते हैं एवं आशा करते हैं कि आप विमर्श की दृष्टि से सार्थक लेखन की दिशा में हमारा सहयोग करेंगे. यह पत्रिका जहाँ एक ओर विश्व पटल पर सृजन क्षेत्र के प्रमुख हस्ताक्षरों को प्रस्तुत करती है वहीं दूसरी ओर सृजन क्षेत्र में कदम रख रहे नव लेखकों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच भी प्रदान करती है. आप सभी सृजनकर्मियों के सहयोग एवं मार्गदर्शन से यह पत्रिका सार्थक दिशा में कार्य करती रहेगी.

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पूर्व प्रकाशित अंक

वर्ष 2017   वर्ष 2, अंक 23, जनवरी-मार्च सयुंक्त अंक, 2017   वर्ष 2, अंक 24, अप्रैल 2017   वर्ष 3, अंक 25-26, मई-जून सयुंक्त 2017 ...